हूती हमले के बाद सऊदी अरब की चिंता बढ़ी, ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन बंद
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच सऊदी अरब को बड़ा झटका लगा है। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के शरूराह क्षेत्र स्थित एक सैन्य अड्डे को निशाना बनाने का दावा किया है। हूतियों के अनुसार, यह कार्रवाई यमन के खिलाफ सऊदी अरब की लगातार सैन्य गतिविधियों के जवाब में की गई।
हूती प्रवक्ता याह्या सरी ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष जारी रहा, तो सऊदी अरब के भीतर और अधिक गहराई तक बड़े हमले किए जा सकते हैं। इसी बीच सऊदी अरब ने अपनी महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।
सैन्य अड्डे पर मिसाइल और ड्रोन से हमले का दावा
हूती विद्रोहियों ने कहा है कि शरूराह स्थित सैन्य ठिकाने पर किए गए हमले में हथियार भंडारों के साथ सैन्य कमान और नियंत्रण केंद्रों को निशाना बनाया गया। प्रवक्ता याह्या सरी ने टेलीग्राम पर जारी बयान में दावा किया कि अभियान में बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल हुआ।
हूतियों का कहना है कि सभी मिसाइल और ड्रोन अपने निर्धारित ठिकानों तक पहुंचे। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
इसी बीच सऊदी नागरिक सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि यमन से दागे गए एक प्रोजेक्टाइल के कारण जाज़ान क्षेत्र में दो लोग घायल हुए हैं। हमले में कई इमारतों को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है, जिनमें एक मस्जिद भी शामिल है।
तेल पाइपलाइन क्यों है महत्वपूर्ण?
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन लगभग 1,200 किलोमीटर लंबी है। यह पाइपलाइन देश के तेल क्षेत्रों को पश्चिमी तट से जोड़ती है और वैश्विक बाजारों तक कच्चा तेल पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण मार्ग मानी जाती है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन करीब 40 से 50 लाख बैरल तेल भेजा जा रहा था। यह वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 4 से 5 प्रतिशत हिस्सा है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की आवाजाही प्रभावित होने के कारण इस पाइपलाइन का महत्व और बढ़ गया था। इसके जरिए सऊदी अरब को समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम करते हुए तेल को वैकल्पिक रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल रही थी।
लाल सागर में भी बढ़ी हूती गतिविधियां
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के आसपास अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, समूह ने पेरिम और हनीश द्वीपों के अलावा मोचा और धुबाब के तटीय क्षेत्रों में भी अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की है।
लाल सागर का समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। इस क्षेत्र में जहाजों पर हमलों के कारण पहले से ही कई कंपनियों ने वैकल्पिक समुद्री मार्ग अपनाए हैं, जिससे परिवहन समय और लागत दोनों बढ़े हैं।
सऊदी ने अमेरिका से मांगी मदद
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत कर हूती विद्रोहियों से निपटने के लिए सहयोग मांगा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी नेतृत्व ने अमेरिका से सैन्य सहायता की अपील की, लेकिन वाशिंगटन ने फिलहाल सीधे सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाए रखी है।
हालांकि, अमेरिका खुफिया जानकारी और अन्य सहायता उपलब्ध करा सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि हूतियों ने उनके प्रशासन से संपर्क किया था और अमेरिका से इस संघर्ष में सीधे शामिल न होने का अनुरोध किया था।
तेल की कीमतों पर असर की आशंका
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी पड़ रहा है। पिछले सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। अमेरिका में डीजल की खुदरा कीमत 6 डॉलर प्रति गैलन से अधिक हो गई, जिसे रिकॉर्ड स्तर बताया जा रहा है।
यदि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य तथा लाल सागर के रास्ते भी बाधित रहते हैं, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर दबाव पड़ सकता है। इसका असर ईंधन की कीमतों के साथ-साथ परिवहन, उत्पादन और महंगाई पर भी दिखाई दे सकता है।
हॉर्मुज पर ईरान की शर्तें
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की कोशिशों के बावजूद अब तक कोई बड़ी प्रगति नहीं हुई है। ईरान का कहना है कि जब तक उसकी सभी शर्तें स्वीकार नहीं की जातीं, तब तक बातचीत से ठोस परिणाम निकलना मुश्किल है।
ओमान की पहल पर ईरान और खाड़ी देशों के बीच बैठक होने की संभावना है। इसमें हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और वहां से जहाजों की आवाजाही जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
ईरान चाहता है कि जलडमरूमध्य पर उसके नियंत्रण को मान्यता दी जाए और वहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने का अधिकार मिले। अमेरिका इस मांग के समर्थन में नहीं है।
इराक पर भी बढ़ा दबाव
सऊदी तेल ढांचे पर हमले के बाद इराक सरकार पर भी दबाव बढ़ गया है। इराक ने माइसान प्रांत के एक सैन्य कमांडर और पुलिस प्रमुख को उनके पदों से हटा दिया है। यह क्षेत्र ईरान समर्थित शिया मिलिशिया के प्रभाव वाला माना जाता है।
इसके अलावा, इराक ने ईरान सीमा के पास स्थित एक प्रमुख सीमा मार्ग को भी बंद कर दिया है। सऊदी अरब ने इराक में सक्रिय ईरान समर्थित संगठनों के खिलाफ फिलहाल कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की है। बताया जा रहा है कि इराकी प्रधानमंत्री के अनुरोध के बाद रियाद ने संयम बरता है।
वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, सऊदी अरब से कच्चे तेल की आपूर्ति कई दशकों के निचले स्तर तक पहुंच गई है। लाल सागर में जहाजों पर हूती समर्थित समूहों के हमलों को भी इसका एक कारण माना जा रहा है।
यदि तेल आपूर्ति के तीन प्रमुख मार्ग—ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, हॉर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर—लंबे समय तक प्रभावित रहते हैं, तो संकट का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। भारत सहित दुनिया के कई देशों में पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधनों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
ईंधन महंगा होने से परिवहन और विनिर्माण लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर महंगाई पर पड़ सकता है। अब सबसे बड़ी चिंता यही है कि वैश्विक तेल आपूर्ति कितने समय तक बाधित रहती है और हॉर्मुज तथा लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग कब तक सामान्य हो पाते हैं।