दिल्ली-एनसीआर में बढ़ता ‘डुअल बर्डन’: डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा
दिल्ली और एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए प्रदूषण ही नहीं, बल्कि चुपचाप फैलती दो बड़ी बीमारियां—डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन)—भी गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। ‘Diabetes and Metabolic Syndrome: Clinical Research and Reviews’ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, इस क्षेत्र में हर 20 में से एक वयस्क इन दोनों स्थितियों के साथ जी रहा है। चिकित्सा भाषा में इसे ‘डुअल बर्डन’ कहा जाता है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अधिकांश लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उन्हें शुगर या ब्लड प्रेशर की समस्या है, क्योंकि ये बीमारियां अक्सर बिना स्पष्ट लक्षणों के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती हैं।
अध्ययन क्या कहता है?
यह एक क्रॉस-सेक्शनल स्टडी थी, जिसमें दिल्ली-एनसीआर के 35 से 55 वर्ष की आयु वाले हजारों वयस्कों की जांच की गई। शोधकर्ताओं ने फास्टिंग ब्लड शुगर, HbA1c, ब्लड प्रेशर और कमर की माप जैसे पैरामीटरों का विश्लेषण किया।
प्रमुख निष्कर्ष:
- लगभग 35% से अधिक लोगों का ब्लड प्रेशर हाई पाया गया, लेकिन उन्हें स्वयं इसकी जानकारी नहीं थी।
- 35–55 वर्ष की आयु समूह में पेट की चर्बी (abdominal obesity) डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर दोनों का प्रमुख कारण बनी।
डबल बीमारी = तीन गुना जोखिम
नोएडा के यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉ. आलोक दुबे के अनुसार, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर अलग-अलग बीमारियां हैं, लेकिन जब ये साथ आती हैं तो एक-दूसरे के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती हैं।
- हाई शुगर रक्त वाहिकाओं की आंतरिक परत में सूजन और कठोरता पैदा करती है।
- हाई ब्लड प्रेशर इन कमजोर नसों पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
- परिणामस्वरूप हृदय आघात, स्ट्रोक, किडनी फेलियर और दृष्टि संबंधी समस्याओं का जोखिम केवल जुड़ता नहीं, बल्कि कई गुना बढ़ जाता है। इसे ‘माइक्रो और मैक्रो वास्कुलर डैमेज’ कहा जाता है।
दिल्ली-एनसीआर में जोखिम क्यों अधिक?
शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस क्षेत्र में उच्च मानसिक तनाव और खराब जीवनशैली मुख्य कारण हैं। इसके अलावा निम्नलिखित कारक भी जिम्मेदार हैं:
1. अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और हाई-सोडियम आहार
पैकेज्ड स्नैक्स, ब्रेड, सॉस और बाहर का खाना इन बीमारियों को बढ़ावा देते हैं। इनमें छिपा नमक और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट सीधे तौर पर ब्लड प्रेशर और इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाते हैं।
2. जीवनशैली और तनाव
अधिकांश लोग 10–12 घंटे डेस्क पर बैठे रहते हैं, व्यायाम नहीं करते और कार्य के दबाव में रहते हैं। इससे शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो न केवल शुगर लेवल बढ़ाता है, बल्कि रक्त वाहिकाओं को सिकुड़ने के लिए भी प्रेरित करता है।
3. वायु प्रदूषण
दिल्ली-एनसीआर की हवा में मौजूद सूक्ष्म कण केवल फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर में सूजन पैदा करते हैं। क्लिनिकल शोधों में इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस और हाई ब्लड प्रेशर से सीधे जोड़ा गया है।
क्या करें?
यह अध्ययन स्पष्ट संकेत देता है कि दिल्ली-एनसीआर की स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। चूंकि ये बीमारियां ‘साइलेंट’ हैं और लक्षण देर से दिखाई देते हैं, इसलिए निवारक कदम उठाना आवश्यक है:
- नियमित रूप से अपना ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर चेक करवाएं।
- यदि आप लंबे घंटे काम करते हैं, तो सुबह और शाम कम से कम 30 मिनट की पैदल चलने की आदत बनाएं।
- अपने दैनिक जीवन में तनाव प्रबंधन तकनीकों को अपनाएं।
- पैकेज्ड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर आप इन गंभीर बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं।