बालाघाट में अभिजीत दीपके के दौरे पर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का हंगामा, CJP ने तंज कसते हुए कहा—“मैं CM पद से इस्तीफा देता हूँ”
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके शनिवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले पहुँचे, जहाँ आदिवासी इलाकों में संक्रामक बीमारियों के कारण बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था का जायजा लेना उनका उद्देश्य था। हालाँकि, उनके आगमन के तुरंत बाद कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने उनकी कार को घेर लिया और उनसे सवाल करने लगे—“क्या आप लाशों पर राजनीति करने आए हैं?”
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिस पर नेटिज़न्स ने मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ दीं। कई यूजर्स ने टिप्पणी की कि सवाल पूछने वाले ऐसे व्यवहार कर रहे हैं मानो अभिजीत दीपके स्वयं मुख्यमंत्री हों। वहीं, दीपके ने भी इस स्थिति पर व्यंग्य करते हुए कहा, “मैं मध्य प्रदेश के राजभवन जाऊंगा और मुख्यमंत्री के तौर पर अपना इस्तीफा सौंप दूंगा।” CJP की ओर से भी ट्वीट किया गया, “भिजीत दीपके को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए।”
अभिजीत दीपके ने बालाघाट के उन आदिवासी परिवारों से मुलाकात की, जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया है। उन्होंने दावा किया कि मौतों के आधिकारिक आंकड़े वास्तविकता से कहीं कम हैं। दीपके के अनुसार, आदिवासियों के प्रदर्शन के बाद कम से कम 86 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनका कहना था कि यदि समय पर इलाज उपलब्ध होता, तो कई बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
वायरल वीडियो में एक महिला, जो खुद को इन्फ्लुएंसर बता रही है, माइक लेकर दीपके से पूछती हुई सुनाई दे रही है कि वे इतनी देर से क्षेत्र का दौरा क्यों कर रहे हैं और क्या वे “लाशों पर राजनीति” करने आए हैं। दीपके ने देरी के लिए खेद व्यक्त किया, जबकि महिला ने यह भी कहा, “यहाँ अच्छी सड़क बनी है, क्या दिखाई नहीं दे रही?”
स्थानीय पत्रकारों ने बताया कि दूरदराज के गाँव में बाहर से आए इन इन्फ्लुएंसर्स के समूह को देखकर वे हैरान थे। कुछ पत्रकारों ने आशंका जताई कि दीपके के दौरे में बाधा डालने के लिए इन लोगों को जानबूझकर भेजा गया हो सकता है, हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी।
इस बीच, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने क्षेत्र में 30 से अधिक बच्चों की मौत के मामले में राज्य सरकार से जवाब माँगा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, बालाघाट जिलाधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बच्चों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल रहा और लगभग 400 बच्चों का इलाज केवल 50 बिस्तरों वाले अस्पताल में किया जा रहा है।