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देश विदेश

दिल्ली में 18वीं ब्रिक्स शिखर बैठक: भारत की तैयारियाँ पूरी

By b9599789@gmail.com
September 9, 2026

राजधानी दिल्ली में 12–13 सितंबर 2026 को भारत मंडपम में होने वाली 18वीं ब्रिक्स शिखर बैठक की सभी व्यवस्थाएं अंतिम चरण में हैं। इस वर्ष भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और सम्मेलन की थीम “Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability के लिए निर्माण” पर केंद्रित है। दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों और भागीदार देशों के नेताओं के अलावा आउटरीच सत्रों में कई अन्य राष्ट्राध्यक्ष भी शामिल होंगे।

शिखर सम्मेलन से ठीक पहले, 9–10 सितंबर को मुंबई में ब्रिक्स के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की अंतिम बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें सदस्य देशों के वित्त विभाग के प्रमुख हिस्सा लेंगे। भारत की अध्यक्षता में अब तक 25 से अधिक भारतीय शहरों में 350 से ज्यादा उच्च-स्तरीय बैठकें और कार्यक्रम आयोजित हो चुके हैं, जो समूह के भीतर रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने के उद्देश्य से किए गए हैं।

ब्रिक्स क्या है?

ब्रिक्स का गठन 2006 में एक अनौपचारिक मंच के रूप में हुआ था, जबकि इसका पहला औपचारिक शिखर सम्मेलन 16 जून 2009 को आयोजित किया गया था। आज यह 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं—ब्राज़ील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात—को एक छत के नीचे लाता है। यह मंच वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व के समकालीन मुद्दों पर संवाद और सहयोग को बढ़ावा देता है।

भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और पहले 2012, 2016 और 2021 में तीन बार इसकी अध्यक्षता कर चुका है; 1 जनवरी 2026 से यह चौथी बार अध्यक्षता संभाल रहा है। 2026 में ब्रिक्स अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर रहा है।

भारत के लिए ब्रिक्स का महत्व

ब्रिक्स भारत को चीन और रूस जैसे प्रमुख देशों के साथ एक ही मंच पर बातचीत का अवसर देता है, साथ ही विकासशील दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और ऊर्जा उत्पादक राष्ट्रों से भी जोड़ता है। यह समूह भारत को उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज के रूप में स्थापित करने में मदद करता है, जो उसकी विदेश नीति का एक प्रमुख लक्ष्य है। इसके जरिए भारत अमेरिका, यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया आदि के साथ अपनी साझेदारी बनाए रखते हुए भी चीन और रूस के साथ रचनात्मक संबंध बनाए रख सकता है।

ब्रिक्स देश लगातार संयुक्त राष्ट्र (UN), अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसे वैश्विक संस्थानों में सुधार की मांग करते रहे हैं, ताकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं की बढ़ती आर्थिक ताकत को इन संस्थानों के कामकाज में उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।

शी जिनपिंग की संभावित भागीदारी और रणनीतिक अवसर

इस शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की संभावना को विशेष महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि यह भारत-चीन संबंधों को संभालने और द्विपक्षीय संवाद को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकता है। एन्सो ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर और एन्सो फाउंडेशन के प्रेसिडेंट वैभव मालू का सुझाव है कि भारत को अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता का उपयोग निर्यात भुगतानों में तेजी लाने, प्रमाणन संबंधी बाधाओं को कम करने और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए फंडिंग जुटाने जैसे ठोस आर्थिक लाभ हासिल करने के लिए करना चाहिए।

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