‘थाईमामन थंगा मोथिरम’ योजना, सरकारी अस्पतालों में जन्मे नवजातों को मिलेगी 1 ग्राम सोने की अंगूठी
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 28 सितंबर 2026 को सरकारी अस्पतालों में जन्मे नवजात शिशुओं को एक ग्राम सोने की अंगूठी देने वाली ‘थाईमामन थंगा मोथिरम’ (माता के भाई की ओर से सोने की अंगूठी) योजना का शुभारंभ करेंगे।
योजना का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
राज्य सरकार का कहना है कि इस योजना से सरकारी अस्पतालों में प्रसव को प्रोत्साहन मिलेगा, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर जनता का भरोसा बढ़ेगा और तमिल संस्कृति में नवजात के जन्म पर मामा की ओर से सोना देने की परंपरा को आगे बढ़ाया जाएगा। तमिलनाडु में हर साल करीब 7.8 लाख बच्चों का जन्म होता है, जिनमें से लगभग 99.9% प्रसव संस्थानों में होते हैं और करीब 53% (लगभग 4.2 लाख) सरकारी अस्पतालों में होते हैं।
पात्रता और लाभार्थी
योजना का लाभ उन नवजात बच्चों को मिलेगा, जिनकी मां तमिलनाडु की स्थायी निवासी हैं और जिनका पंजीकरण पीआईसीएमई (PICME) पोर्टल पर RCH पहचान संख्या के साथ किया गया है। पात्रता के लिए मां को निवास का प्रमाण देना होगा; राशन कार्ड, वोटर आईडी, आधार, लेबर वेलफेयर बोर्ड आईडी, डाक विभाग का पता कार्ड या मूल निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज स्वीकार किए जाएंगे।
वितरण और व्यवस्था
- हर अंगूठी पर एक अद्वितीय क्रमांक होगा और इसे टैम्पर-प्रूफ (छेड़छाड़-रोधी) पैकिंग में दिया जाएगा।
- पहले चरण के लिए 1.28 लाख एक ग्राम सोने की अंगूठियां खरीदी जा चुकी हैं।
- 22 सितंबर से इन अंगूठियों का वितरण 107 केंद्रों के माध्यम से शुरू किया जाएगा, और आगे चलकर पात्र बच्चों को सरकारी अस्पताल से डिस्चार्ज के समय अंगूठी दी जाएगी।
- योजना का प्रभाव 22 जून 2026 (विजय का जन्मदिन) से पूर्वव्यापी (retrospective) होगा, यानी उस तारीख के बाद सरकारी अस्पतालों में जन्मे बच्चे भी लाभ के पात्र होंगे।
बजट और प्रबंधन
राज्य बजट में इस योजना के लिए वार्षिक लगभग 755.83 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। तमिलनाडु मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन सोने की अंगूठियों की खरीद और आपूर्ति करेगी, जबकि एक प्रोजेक्ट एवं प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट योजना के कार्यान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी संभालेगी।
चुनाव आयोग की पाबंदियां
चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों के मद्देनजर राज्य सरकार को इन दोनों क्षेत्रों में इस योजना को लागू करने की अनुमति नहीं मिली है। इन उपचुनाव वाले क्षेत्रों में सरकार को केवल मुफ्त नाश्ता योजना के विस्तार की मंजूरी मिली है।
राजनीतिक संदर्भ
यह योजना 6 अक्टूबर के विधानसभा उपचुनाव से पहले सामने आई है, जबकि राज्य में कुल 7 विधानसभा सीटें खाली हैं और उनमें से दो पर उपचुनाव होने वाले हैं। सरकार का कहना है कि उसे पिछली डीएमके सरकार से कमजोर वित्तीय स्थिति विरासत में मिली है और तमिलनाडु पर करीब 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है, इसलिए कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है। सोने की अंगूठी वाली योजना विजय के चुनावी वादों में भी शामिल रही है।