अमेरिका का रूसी तेल बिल और भारत पर 100% टैरिफ का खतरा
अमेरिका के कांग्रेस में पारित हुए एक नए सैंक्शंस बिल के बाद भारत और अमेरिका के बीच तनाव की स्थिति बनती दिख रही है. इस विधेयक के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की शक्ति मिलती है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार और रिश्तों पर असर पड़ सकता है.
बिल का नाम और पृष्ठभूमि
इस विधेयक का आधिकारिक नाम “Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026” रखा गया है. हालांकि सीनेटर लिंडसे ग्राहम का अब निधन हो चुका है, लेकिन वे रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर कड़े टैरिफ के पक्षधर थे और अक्सर भारत को निशाने पर रखते थे. उनके सम्मान में इस बिल का नामकरण किया गया है.
अमेरिकी नेताओं की चेतावनी
डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भारत और चीन से साफ कहा है कि वे रूसी तेल-गैस खरीदना बंद करें और दूसरे स्रोत तलाशें. उन्होंने कहा, “भारत और चीन, अपना रवैया सुधारो. कहीं और से तेल खरीदो. तुष्टिकरण की कोई नीति नहीं है.”
इसी सुर में डेमोक्रेट सीनेटर जीन शहीन ने कहा कि रूस “शैडो फ्लीट” के जरिए अपने तेल-गैस को बाजार भाव से कम कीमत पर बेच रहा है, और इसकी आपूर्ति मुख्य रूप से चीन और भारत जैसे देशों को हो रही है. उन्होंने जोर दिया कि केवल पुतिन ही नहीं, बल्कि रूसी ऊर्जा खरीदने वाले हर देश को इसकी कीमत चुकानी होगी.
क्या भारत पर तुरंत 100% टैरिफ लगेगा?
नहीं. यह बिल स्वतः प्रभाव से टैरिफ लागू नहीं करता, बल्कि राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वे चुनें कि किन देशों पर और कब टैरिफ लगाया जाए. विधेयक पहले सीनेट से पारित हुआ (अगस्त में 86–11 से), और अब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा) से 262–159 के मत से पास होकर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की राह देख रहा है.
वोटिंग के आंकड़ों के मुताबिक, 203 रिपब्लिकन, 58 डेमोक्रेट और एक निर्दलीय ने पक्ष में मतदान किया, जबकि 7 रिपब्लिकन और 152 डेमोक्रेट्स ने विरोध किया. एक बार ट्रंप के साइन के बाद वे पांच बड़े रूसी क्रूड/गैस खरीदार देशों पर 100% तक टैरिफ लगा सकते हैं; इनमें भारत और चीन शामिल हो सकते हैं.
भारत की प्रतिक्रिया: “1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि”
भारत ने साफ किया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को सबसे आगे रखेगा और व्यापार-आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा. विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस मुद्दे पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर चर्चा हुई है, और भारत ने स्पष्ट किया है कि इसके असर सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकते हैं.
सरकारी बयान में कहा गया, “भारत अपनी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्पित है, और विविध स्रोतों व बदलते बाजार के हिसाब से तेल खरीदता रहेगा.”
क्या भारत पहले से तैयारी कर रहा है?
अमेरिका–ईरान तनाव और संभावित आपूर्ति झटकों के मद्देनजर भारत ने पहले ही सप्लाई स्रोतों को विविध बनाने की योजना बनाई हुई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ब्राजील सहित कई देशों से तेल खरीद के विकल्प तलाश रहा है ताकि किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम हो.
निष्कर्ष: अधिकार मिले, लेकिन तय नहीं हुआ टैरिफ
संक्षेप में, यह बिल राष्ट्रपति को 100% टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार देता है, लेकिन यह स्वचालित नहीं है. असल असर इस बात पर निर्भर करेगा कि ट्रंप प्रशासन इस शक्ति का इस्तेमाल कब और कैसे करता है, और भारत अपनी ऊर्जा खरीद रणनीति व कूटनीतिक बातचीत से स्थिति को कैसे संभालता है.