चित्तौड़गढ़ में 300 साल पुराना वटवृक्ष बना आस्था और जिज्ञासा का केंद्र
चित्तौड़गढ़: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के भादसोड़ा कस्बे में स्थित एक करीब 300 वर्ष पुराना बरगद का पेड़ श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ऐतिहासिक जैन श्वेतांबर मंदिर परिसर में मौजूद इस वटवृक्ष की सबसे बड़ी खासियत इसकी अलग-अलग आकार वाली पत्तियां हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस पेड़ पर करीब 13 प्रकार की पत्तियां दिखाई देती हैं। इनमें गोल, हृदय के आकार की, लंबी-संकरी और नुकीली पत्तियां प्रमुख हैं। एक ही पेड़ पर पत्तियों के इतने अलग-अलग स्वरूप नजर आना लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है।
जड़ों के सहारे फैला है पेड़
भदेसर उपखंड के भादसोड़ा स्थित मंदिर परिसर में मौजूद यह बरगद सामान्य पेड़ों से काफी अलग दिखाई देता है। इसका पारंपरिक मुख्य तना स्पष्ट रूप से नजर नहीं आता। पेड़ का विस्तार जमीन के ऊपर मुख्य रूप से जड़ों और उनसे बने सहारों के जरिए हुआ है।
वनस्पति विशेषज्ञों के अनुसार, बरगद की शाखाओं से निकलने वाली हवाई जड़ें धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ती हैं और जमीन में पहुंचकर नए सहारे का काम करती हैं। समय के साथ ये जड़ें मोटी होकर पेड़ के फैलाव को संभालने लगती हैं। इसी प्राकृतिक प्रक्रिया के कारण पुराने बरगद के पेड़ में तना और जड़ों का स्वरूप सामान्य पेड़ों से अलग दिखाई दे सकता है।
मंदिर परिसर में होने के बावजूद सुरक्षित
इस विशाल वटवृक्ष की एक और विशेषता यह है कि मंदिर परिसर के बीचोंबीच फैले होने के बावजूद इससे मुख्य भवन को अब तक कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा है। पेड़ लंबे समय से मंदिर परिसर का हिस्सा है और धार्मिक महत्व के कारण श्रद्धालु इसे विशेष आस्था से देखते हैं।
जति संत से जुड़ी स्थानीय मान्यता
स्थानीय मान्यता के मुताबिक, कई वर्ष पहले एक जति संत इस वटवृक्ष को यहां लेकर आए थे। इसके बाद से यह पेड़ मंदिर परिसर में लगातार मौजूद है। जैन धार्मिक स्थलों पर पेड़-पौधों और प्राकृतिक संरचनाओं के संरक्षण की परंपरा रही है, जिसके चलते इस वटवृक्ष को भी सुरक्षित रखा गया।
पत्तियों की विविधता बनी आकर्षण
एक ही पेड़ पर अलग-अलग आकार की पत्तियां दिखाई देने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों में इसके प्रति जिज्ञासा बनी रहती है। गोलाकार, हृदयाकार, संकरी और नुकीली पत्तियों को लोग इस वटवृक्ष की अनोखी पहचान मानते हैं।
हालांकि, पत्तियों के आकार में इतनी विविधता के पीछे वास्तविक वनस्पति कारण क्या है, इसका वैज्ञानिक अध्ययन अभी आवश्यक है। विशेषज्ञों का विस्तृत निरीक्षण ही इस विशेषता की स्पष्ट वजह बता सकता है।
आस्था के साथ प्राकृतिक रहस्य
आदिनाथ श्वेतांबर मंदिर के ट्रस्टी और अध्यक्ष राजमल भादविया के अनुसार, यह वटवृक्ष लंबे समय से मंदिर परिसर में मौजूद है। उन्होंने बताया कि पेड़ दिखाई देने वाले पारंपरिक तने के बजाय जड़ों के सहारे खड़ा है और इसकी शाखाओं पर करीब 13 प्रकार की पत्तियां नजर आती हैं।
अपने विशाल आकार के बावजूद मंदिर भवन को नुकसान न पहुंचाने वाला यह प्राचीन बरगद आज श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था, जबकि अन्य लोगों के लिए प्राकृतिक रहस्य और जिज्ञासा का विषय बना हुआ है।